नशे की गिरफ्त में युवा बन रहे हैं अपराधी



नशा हमारे समाज में कैंसर का काम कर रहा है अज्ञान में हमारे युवा इसकी लत का शिकार हो रहे हैं इसको इस्तमाल करने के साथ ही इसको खरिदने का खर्च भी चाहिए उसके लिए हमारे युवा तस्कर भी बन रहे हैं और ड्रग माफिया का काम आसान बन रहा है
हमारे देश में कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए पुलिस है अपराध होता है तो रोकने का काम पुलिस का होता है परंतु हम सबको अपराध को रोकने के साथ ही उसे जड़ से खत्म करना है कारण खोजना है कि क्यों नशा समाज में बढ़ रहा है
अब आप अंदाज़ा लगाएँ नशा कुंटलो में आता है और बढ़ जाता है पुलिस की गिरफ़्त में आते हैं 200 300 ग्राम वाले और इसे हम लोग अच्छा काम मान कर तारीफ करते हैं परंतु बड़ी मछली पर कोई हाथ नहीं डालता इसका सबसे बड़ा उदाहरण है
पंजाब के मानसा मे पलविंदर झोटा जिसने नशे के खिलाफ मुहिम चलाई और जब भी वह बड़ी मछली तक पहुंचने की कोशिश करता है तो उसे झेलना पड़ता है जेल जाना पड़ता है कारण कानून की समझ वाले उसकी गलती निकाल कर उस पर कारवायी करवा देते हैं आप अंदाजा लगा सकते हैं
जो व्यक्ति करोड़ो का नशा ला सकता है उसकी पकड़ कितनी मजबूत होगी एक दरोगा या सब इंस्पेक्टर अगर उसे छेड़ेगा तो उसका ट्रांसफर पक्का और अगर नशे में उलझे हुए व्यक्ति को पकड़ कर पुलिस कार्रवाई करने का नाटक करती है तो दरोगा जी की तरक्की पक्की क्योंकि अच्छा काम किया है
इन शब्दों से हम उन पुलिस वालों पर उंगली नहीं उठा रहे हैं हम तो बस इतना कह रहे हैं कि अगर पुलिस थोड़ी और मुस्तैदी दिखाए तो जड़ को उखाड़ा जा सकता है और युवाओं को नशेड़ी और अपराधी बनने से रोका जा सकता है
यह जिमेदारी हमारे समाज के एक रक्षक और जिम्मेदार लोगों की ताकि अपराध को जड़ से खत्म किया जा सके एक नशे से गृस्त व्यक्ति की मानसिकता भावुक और गुस्सैल प्रवृत्ति की है और अगर उसने जेल जैसी जगह का अनुभव ले लिया और उसकी हिम्मत बढ़ गई तो वह व्यक्ति बड़ा अपराधी भी बन सकता है जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी और इस बड़े तंत्र को तोड़ हमारे युवाओं को बचाना पड़ेगा बाकी आप लोग अपने अनुभव और विचार रखेंगे (जय हिंद)

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