पंजाब सरकार पंजाब की कानून व्यवस्था लागू करने पर असफल।

पंजाब सरकार पंजाब की कानून व्यवस्था लागू करने पर असफल। 

  पंजाब में एक के बाद एक कई घटनाओं ने भगवंत मान सरकार का असफल चेहरा लोगों के सामने ला दिया है। सरकार के एम एल ए का रिश्वत केस में फंसना और उसके बाद अमृतपाल सिंह और उसके साथियों का गुरु ग्रंथ साहब जी की आड़ में पुलिस पर हमला और कल केंद्रीय जेल गोबिंदवाल में दो व्यक्तियों की गैंगवार में हत्या सरकार को असफलता के कटहरे में खड़ा करती है आइए क्रमवार हुई इन घटनाओं के ऊपर विचार विमर्श करें:-

बठिंडा देहाती के विधायक गिरफ्तार:-

                       जब आम आदमी पार्टी की पंजाब में सरकार बनी थी। तो शुरू के माहौल में लगता था कि अब पंजाब तरक्की के रास्ते पर आएगा। अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत नहीं ले पाएंगे। परंतु पहले स्वास्थ्य मंत्री ने कमीशन की मांग की और उन्हें करप्शन में गिरफ्तार कर लिया गया। मंत्री का पद चला गया और विधायक के रुप में सरकार के साथ जेल से आने के बाद काम कर रहे हैं। इस घटना से प्रशासन और दूसरे नेताओं को सीख लेनी चाहिए थी परंतु बठिंडा देहाती की घटना के बाद इसकी उम्मीद ना मात्र है जो फंस गया वह चोर है। इसी नीति पर पंजाब में सत्ता पक्ष की सरकार चल रही है। आप फंसे विधायक को प्रार्थना की गई थी कि पंचायत सेक्टरी और दूसरे अधिकारी रिश्वत मांगते हैं। विधायक ने खुद ही रिश्वत मांगी थी। विजिलेंस टीम ने कार्रवाई की विधायक जी रिमांड पर चल रहे हैं। लग रहा था इतने सख्त फैसले लेने के बाद सरकार कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चला पाएगी। परंतु इस घटना के बाद फिर से सरकार और प्रशासन को शर्मसार होना पड़ा।

वारिस पंजाब दे की टीम ने अमृतपाल सिंह के नेतृत्व में पुलिस पर किया हमला:-

  अजनाला (अमृतसर) की इस घटना ने फिर से एक बहस को जन्म दे दिया कि कोई संगठन या कोई व्यक्ति संविधान व प्रशासन से ऊपर हो सकता है। जिस तरह से गुरु ग्रंथ साहब की आड़ लेकर पुलिस पर हमला किया गया जैसा कि उच्च अधिकारी अपने बयानों में बता रहे हैं। यह शर्मनाक है और इस पूरे घटनाक्रम में गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर राजनीति, अपना बचाव करना बहुत ही शर्मनाक और गंदी हरकत है। इसमें पहले पुलिस ने एक व्यक्ति की रिपोर्ट पर अमृतपाल सिंह के साथी को गिरफ्तार किया। मुकदमा दर्ज किया। और जब अमृतपाल सिंह और उसकी टीम प्रशासन पर हावी हो गए। तो जांच के नाम पर यह कहकर मुकदमा खारिज कर दिया कि शिकायत झूठी है और अमृतपाल सिंह को और उसकी टीम को क्लीन चिट दे दी। अगर शिकायत झूठी थी। तो इस पूरे मामले में राजनीति करने वाले को सामने क्यों नहीं लाया गया। यहां पर यह भी बता दें अमृतपाल सिंह ने इंदिरा गांधी के हश्र की बात की थी गृह मंत्री अमित शाह को बातों बातों में धमकी दे दी। उसके बाद इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया। यानी यहां पर राजनीति हुई। अमृतपाल सिंह को फांसने के लिए परंतु वह बीच में गुरु ग्रंथ साहब जी की आड़ लेकर और पुलिस पर हमला करके एक नई बहस को जन्म दे गया। अब इस पर राजनीति होती रहेगी। कोई इसमें अमृतपाल सिंह की तारीफ करेगा और कोई उसे कोसेगा।

                          परंतु इस सारे मामले में पंजाब बदनाम हुआ और विदेशों से व्यापार करने के लिए कंपनियों को पंजाब में लाने का प्रयास इस माहौल में असफल होता नजर आ रहा है। परंतु किसी को क्या मतलब पंजाब के साथ ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम होता रहा है। यही पंजाब की बर्बादी का कारण है इसी कारण से मूल निवासी विदेशों में जा बसे हैं। और खालिस्तान की मांग कर रहे हैं। पंजाब को हमेशा राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया है।

गोबिंदवाल जेल में गैंगवार और हत्याएं :

पंजाब में जिस तरह से पिछले कई सालों में माफिया ग्रुप हावी हुए हैं। और पंजाब पुलिस नाकामयाब हुई है। यह शर्मनाक है यह वही पंजाब पुलिस है। जिसने पंजाब में आतंकवाद को काबू में किया था। परंतु इस समय माफिया ग्रुप पूर्ण रूप से हावी है। इसी को बयान कर रही है गोबिंदवाल जेल की यह गैंगवार की घटना जिसमें दो लोगों की हत्या हो गई। यहां सवाल खड़े होते हैं। कि जब जेल प्रशासन को पता था कि इन लोगों में कोई बात चल रही है तो यह लोग इकट्ठा कैसे थे। बाकी यहां तक हमें जानकारी है। जेल में ग्रुप ना बने। इस बात का ध्यान जेल के जिम्मेदार अधिकारी रखते हैं। परंतु यहां तो 40-50 लोग और एक ही ग्रुप के लोग इकट्ठा एक ही बैरक में थे। इसका मतलब जेल प्रशासन और इन लोगों की आपस में सांठ गांठ है। और प्रशासन की लापरवाही है। अब यहां पर अगर कह दे कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। तो जांच भी तो वही अधिकारी करेंगे। जिन्होंने हो सकता है यह ग्रुप को की सिफारिश की हो। बिना राजनीतिक सरपरस्ती के यह ग्रुप पनप नहीं सकते हैं।

                      पंजाब के चाहने वाले लोग चाहते हैं कि पंजाब तरक्की करें परंतु पंजाब में राजनीति के कारण पंजाब फिर से बर्बादी के दौर की तरफ जा रहा है। मोहाली में बंदी सिंहगों की रिहाई का मुद्दा चल रहा था। इसी बीच एक के बाद एक होती पंजाब की घटनाएं पंजाब के माहौल को दोबारा से खराब कर देंगी। यहां पर प्रशासन को चाहिए कि बिना किसी राजनीतिक दबाव के और पूर्णता ईमनदारी के साथ सख्त कदम उठाए।

                                   जय हिंद।🙏


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