UP News :- Azam Khan :- आजम खां क्यूँ मीडिया के सामने बात बात पर तंज कसते और मजाक से बात करते नजर आया करते हैं। ?

रामपुर के बड़े सपा नेता आजम खां का इंटरव्यू सुना और मीडिया ने जब विपक्ष के निष्क्रिया होने की बात कही तो आजम खां ने अपने या अपनी पार्टी के लिए बड़ी बड़ी बातें नहीं की और योगी या मोदी सरकार पर बिना आरोप लगाए बातों बातों में मीडिया कर्मियों के मुंह से ही सरकार के खिलाफ कहलवा गए और एक सवाल छोड़ गए कि मीडिया जब सब जानती है। तो दिखाती या लिखती क्यूँ नहीं ये शब्द उन्होंने कहे नहीं परन्तु मीडिया के सवालों में उन्ही पर तंज कस गए एक प्रकार से उदाहरण जैसे मीडिया ने कहा महंगाई बढ़ रही है। और वो कह रहें हैं। कहाँ है। मंहगाई मतलब खुद लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कह रहा है। कि ये कमी है। और विपक्ष का नेता या यूँ कहे बड़ा नेता कह रहा नहीं है।



शायद ऐसा बर्ताव आजम खां अपने साथ हुए प्रशासनिक कार्यों या कार्यवाही के कारण कह रहे है। योगी सरकार में जैसा बर्ताव या जैसी कार्यवाहियाँ और मुकदमें आजम खां पर लादे गए उसी से ख़फ़ा आजम खां ऐसे ब्यान देकर सवाल छोड़ रहें है। ये सब सोचने का विषय है। कि विपक्ष का साथ न देकर मीडिया सत्ता पक्ष का गुणगान कर रहा है। शायद ये ही चीजें आजम खां को चुभ रही है। उन्होंने सपा को एक विचारधारा बताया जो जल्दी ख़त्म नहीं हो सकती।

अब यहाँ इतना ही कहना चाहेंगे भारत के लोकतंत्र में विपक्ष और मीडिया दोनों की अहम् भूमिका है। उनकी इस भूमिका के पीछे ये तर्क है कि सत्ता पक्ष सही कार्य या नीतियां लागू करे इसलिए ये सब लोकतंत्र में होता है। परन्तु अब कोई पूछने व कहने वाला नहीं है। क्यूँ मीडिया को चलाने के लिए पैसा चाहिए और पैसा तभी मिलता है। जब आप गलत को अनदेखा करें इस कारण से मीडिया या सही मीडिया आखिरी साँसे ले रही है। और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चलने वाली मीडिया को ही सरकारी विज्ञापन मिलते हैं ये सत्य है।

पूंजीपतियों ने पैसा पैदा करने के लिए और उनके खिलाफ कोई समस्या न आये अपनी मीडिया खड़ी कर दी है। लोकतंत्र का ये अध्याय जिसमें बहुत कमियां हैं। यही कारण है। जब हम लोग दूसरों को कमी नहीं दिखा पाते और वो अपनी समझ के अनुसार कार्य करता जाता है। और नुक्सान जनता का और देश का होता है।

हम लोगों को गुलामी में रहने के बाद भी ये सब समझ नहीं आया ये दुर्भाग्य है। हमारा हम लोगों को इतिहास से सीख लेनी चाहिए परन्तु हम लोगों का मार्ग दर्शन भी तो मीडिया ने ही करना है। हम लोग गलत या सही का निर्णय तभी तो ले पाएंगे जब जान पाएंगे। जानकारी भी तो मीडिया देगी। यहाँ पर मैं या मेरी कलम आजम खां के हक़ में नहीं जो सत्य मुझे लगता है उसे बयाँ कर रही है। और उस नेता ने जो व्यंग करे उससे साबित होता है कमियां हैं। परन्तु उन पर कार्य हो ऐसी हैसियत न विपक्ष की है न मीडिया की क्यूँ ज्यादातर मीडिया सत्ता पक्ष के हक़ में है। और यही कमी मंहगाई आदि मुद्दों को दबा रही है।

यही सत्य है। और इसी पर काम करने की जरुरत है।

जय हिन्द।

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