Government of Uttar Pradesh - Sugarcane Policy :- वादे करने के बाद भी योगी, मोदी किसानों को गन्ना नीति के अनुसार भुगतान क्यूँ नहीं दिला पा रहे ?

गन्ना और उसकी खेती हमारे किसानों की मुख्य फसलों में है। इसी फसल की आमदन से घर चलते हैं। किसानों के कुछ जगह ऐसी है यहाँ धान, गेंहू की फसल में नुक्सान है। यहाँ बाढ़ के पानी की मार होती है। वही पर मुख्य फसल गन्ना है। परन्तु हमारे नेता वादा करके भी गन्ने का भुगतान नहीं दिलवा प् रहे पहले पंजाब हरियाणा  में भी गन्ने की फसल होती थी परन्तु भुगतान की समस्या के कारण वहां के ज्यादातर किसानों ने इस खेती को छोड़ दिया वहां गेंहू और धान मुख्य फसलें हो गई अब समस्या कहाँ है। इस पर बात करते हैं।



जैसा कि बताया की किसान अपनी फसलों से कमाता है। परन्तु सरकार उनको उनकी फसल का भुगतान दिलाने में असमर्थ हैं। और किसान उधार देता है। अपनी फसल, अब अगर आपको पैसा चाहिए उधार तो आपको पैसा देना पड़ता है। ब्याज की ली हुई रक़म पर, परन्तु किसानों को उनके लाखों रुपये लेट मिलने पर कुछ नहीं मिलता और तो और पैसा भी किस्तों में मिलता है जिसके कारण उसका लाभ ख़त्म हो जाता है। ये हाल हर सरकार के दौर में चला। कहतें हैं। 2005 के समय तुरंत पैसे मिलते थे गन्ने की फसल के।

अब बात वर्तमान की अभी जब गोला गोकरणनाथ में उप चुनाव हुआ तो प्रदेश के मुख्यमंत्री ने खुले मंच से चेतावनी देते हुए वादा किया था कि कुशाग्र बजाज के लिए हमारी जेलें खाली हैं। और शुगर मिलें चलने से पहले सारा भुगतान किसान के खाते में आ जाएगा परन्तु ये वादा भी झूठा निकला और यहाँ याद करवा दें कि जब मोदी जी आये थे लखीमपुर रैली में उन्होंने भी 14 दिन में भुगतान की बात कही थी परन्तु सब चुनावी जुमले ही साबित हुए।



हद तो तब हो रही है जब बजाज ग्रुप की शुगर मिलों की आरसी कटने की खबर आई। भुगतान बाकी है। तब भी फिर से किसानों का उधार गन्ना फिर से मिलों को दिया जा रहा है। शासन व प्रशासन ने आँखे क्यूँ बंद कर रखी हैं। ये सोचने का विषय है। क्या मजबूरी है। या पार्टी फंड और टेबल के नीचे से अटैची लेकर कोई नहीं आता। सबने आँखे बंद कर ली है। कारणों पर अंदाजा ही लगा सकते हैं। और हाँ ये भी हो सकता है। जैसा बताया भी जाता है। मिल के अधिकारियों के तरफ से कि हमारा सरकार पर पैसा बाकी है। या इतना गन्ना सरकार कहाँ ले जायेगी शुगर मिलें तो मायावती जी ने अपने शासन के समय बेच दी थीं। या ये सब इसलिए भी हो रहा हो किसान अपनी जमीन बेचे उधोग लगे और किसानी ख़त्म हो जाये कुछ भी संभव है।



अब ये तो नहीं कही जा सकता कि हमारे नेताओं के संज्ञान में ये मुद्दा नहीं है। वो तो खुद वादे कर चुके हैं। और अगर ये नेता बदलाव लाएंगे तो पिछले कई वर्षो की ये समस्या के समाधान पर उचित कदम क्यूँ नहीं ये सब सवाल उठ रहें हैं। जिम्मेदार कौन होगा। अगर आरसी कटने पर भी शुगर मिल गन्ना उधार खरीद रही है। और सबने आँखे मूँद रखी हैं। तो कुछ तो कारण होंगे इसके पीछे जवाब लेगा कौन और देगा कौन इस सबकी जिम्मेदारी कौन लेगा। और ये हाल पिछले कई वर्षो से हैं। तो इस समय का विपक्ष भी जिम्मेदार है। इसलिए सरकार का नहीं जवाब व जिम्मेदारी चाहिए सत्य क्या है वह, चाहिए। किसान को सुरक्षा चाहिए। अब हमने अपना धर्म निभाया आप अपना निभाए।

जय हिन्द।

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