Punjab News :- सिमरनजीत मान और अमृतपाल सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह को लेकर नकारात्मक क्यूँ ?

जैसा कि सब जानते हैं। कि भगत सिंह नास्तिक थे और कामरेड थे परन्तु देश के लिए उनका बलिदान दिखता है। कि जबर से लड़ मिटने का जज्बा जो सिखों में है। अलग अलग वैसा ही प्रदर्शन भगत सिंह ने किया। भगतसिंह का मानना था धर्म कायर बनाता है। यहाँ तक मै गलत नहीं हूँ। करतार सिंह सराभा या भगत सिंह का मेन टार्गेट देशहित में कार्य करना था परन्तु अब जब सिखों के नेता मान साहब या अमृतपाल सिंह से भगत सिंह के बारे में पूछा जाता है। तो उनके विचार नेगेटिव होतें हैं।



अमृत पाल सिंह कहते हैं। शहीद भगत सिंह एक भटका हुआ नौजवान था जिन्होंने पंजाबी का विरोध किया था क्यूँ इस समय के सिख नेता इन्ही कारणों से भगत सिंह से सहमत नहीं हैं। और सबसे बड़ी बात खालिस्तान के मुद्दे पर सभी कामरेड नेता भारत के साथ हैं। यहाँ ये स्पस्ट कर दूँ। कि सिख नेताओं के अनुसार वादा खिलाफी आजादी के बाद हुई है। इसलिए भगत सिंह तो अब रहे नहीं परन्तु उनके किरदार नेगेटिव टिप्पणियां करके भगत सिंह की सख्सियत को कम नहीं किया जा सकता वैसे भी कामरेड इस समय माओवादियों के रूप में कार्य कर रहें हैं। जो भारत के बर्ताव से खुश नहीं है। परन्तु एक घड़ा आजाद भारत में कांग्रेस की B टीम के रूप में भी कार्य करता रहा क्यूँ राजनीतिक रूप से पूणतः कभी भी कामरेड भारत की सत्ता पर नहीं आये। हाँ एक बार कामरेड हरकिशन सुरजीत के पास मौका था प्रधानमन्त्री बनने का परन्तु वो अलग अलग पहियों की सरकार का नेतृत्व करने को तैयार नहीं हुए और मना कर गए। यहाँ ये कहना उचित होगा देश बदल रहा था जो बाद में आहिस्ता आहिस्ता BJP की विचारधारा की तरफ चला गया।





इस बात से ये सिद्ध होता है कि अपनी विचारधारा को लेकर कामरेड भी कट्टर है। और उनके सिद्धांतों में भी धर्म को लेकर अच्छी सोच कभी नहीं रही तो भगत सिंह से कैसे उम्मीद की जा सकती थी और भगत सिंह की मानसिकता पर अब सिख नेता सवाल उठा रहे हैं। चलिए हम लोगों के लिए भगत सिंह आदर्श थे पर धर्म में भी विश्वास है। और शायद सिमरनजीत सिंह मान और अमृतपाल सिंह को भी उस पर विचार रखने से बचना चाहिए क्यूंकि इस समय कामरेड पार्टी विलुप्त है। कुछ मुट्ठी भर लोगों को छोड़कर और सिख नेताओं को विचारिक जंग उन लोगों से करनी चाहिए जो बिना मतलब अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं।

जय हिन्द।

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