Guru Tegh Bahadur Ji Martyrdom Day : - गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और शहीदी दिवस पर एक विशेष बातचीत। सरकार के द्वारा शहीदी दिवस पर छुट्टी की घोषणा ।

गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 1 अप्रैल 1621 को अमृतसर (पंजाब) में हुआ। उनके पिता जी का नाम गुरु हरगोविंद जी और माता का नाम नानकी जी था। उनके भाई का नाम गुरदिता जी था गुरु जी का बचपन का नाम त्यागमल था परन्तु 14 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता जी के साथ मुगलों के खिलाफ करतार पुर की जंग लड़ी और उनकी बहादुरी के कारण उनका नाम तेग बहादुर पड़ा गुरु जी ने बहुत भक्ति की, मानवता की सेवा की, गुरु की उपाधि उनको 20 मार्च 1664 को मिली। गुरु जी का विवाह 1634 में माता गुजरी जी से हुआ। उनके पुत्र का नाम गुरु गोविन्द सिंह जी था। गुरु जी सिखों के नौवें गुरु बने। तेग बहादुर का अर्थ होता है। बहादुर तलवार धारी।



गुरु जी के बलिदान का कारण बना औरंगजेब का क्रूर शासन और गुरु जी का जबर पर विरोध अब आप को बतातें हैं। कैसे सब हुआ कैसे चापलूसों ने एक शासक को धर्म के खिलाफ तैयार किया। बात उस समय की है। जब औरंगजेब के दरबार में एक विद्वान पंडित गीता के श्लोकों का अर्थ औरंगजेब को बताता था परन्तु एक समय पंडित जी बीमार हो गए और पंडित जी औरंगजेब को कुछ बातें नहीं बताते थे उसका कारण ये था वो दरबार और वहां के लोगों और शासक के स्वभाव से परिचित थे परन्तु बीमार होने पर उनकी जगह उनका बीटा आया जिसे न बताने का कारण नहीं पता था जब उसने गीता के श्लोकों का पूरा अर्थ समझाया तो औरंगजेब को लगा ये एक महान ग्रन्थ है। कुछ समय के लिए बादशाह प्रभावित हो गया जो काजी और मौलाना लोगों के बर्दाश्त से बाहर था उन लोगों ने बादशाह को कहा कि अगर वो सब को इस्लाम कबूल करवा दें तो इतिहास में अमर हो जाएंगे। इसीलिए औरंगजेब जबरन पंडितों और हिन्दुओं पर जुल्म करने लगा। तब कश्मीरी पंडित गुरु जी के दरबार में रक्षा करने की गुहार लगाने गए। 



और गुरु जी ने कुर्बानी देकर कौम (लोगों) को जागने की बात कही उनकी गोदी में बैठे बालगोविन्द जी ने कहा आप से बड़ी कुर्बानी किसकी होगी इसी कारण से गुरु जी ने 24 नवम्बर 1675 को चाँदनी चौक पुरानी दिल्ली में कुर्बानी दी उनकी कुर्बानी से लोगों में औरंगजेब के प्रति नफरत पैदा हुई। हुकूमत के खिलाफ माहौल तैयार हुआ। उनकी कुर्बानी के कारण उन्हें हिन्द की चादर भी कहा जाता है।





भारत में जब से सरकार बदली विचार बदले BJP के शासन काल में विशेष ध्यान रखा गया कि उन किरदारों के ऊपर विशेष ध्यान दें जो मुसलमानों के खिलाफ थे। इसी कारण इस सरकार ने गुरु जी के शहीदी दिवस पर स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में छुट्टी की घोसड़ा पिछले दो वर्षो से हो रही है। इस बार पहले 24 नवंबर को छुट्टी की घोसड़ा हुई बाद में ये 28 नवम्बर को कर दी गई पिछले साल ये 4 दिसंबर को थी इसके बारे में स्पष्ट कारण तो पता नहीं परन्तु शहीदी पर छुट्टी और छोटे शाहिबजादों के शहीदी दिवस को वीरबाल दिवस के रूप में मनाएं जाने की घोसड़ा ये जरूर दर्शाती है। कि सरकार मुसलमानों के शासन काल की हर घटना को लोगों के सामने लाना चाहती है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ जी का सिखों और गुरु जी के प्रति श्रद्धा की भावना जगजाहिर है। परन्तु उनका हिन्दू धर्म के प्रति लगाव और मुसलमानों के प्रति भावना भी जग जाहिर है।



इस सम्मान की भावना में सरकार ने शहीदी दिवस पर भी छुट्टी कर दी। हालांकि सिखधर्म किसी भी धर्म या सभ्यता के खिलाफ नहीं है। सिखों ने हमेशा जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई और अपने जीवन की कुर्बानी दी इसमें सिंह की उपाधि जब गुरु गोविन्द सिंहजी ने दी तो उन्होंने सभी धर्म के लोगों को इस मुहीम में जोड़ा ये बात अलग है। हिन्दू ज्यादा जुड़े। सभी धर्मों का बराबर सम्मान किया गया। गुरु ग्रंथ साहिब में कई विद्वानों के श्लोक व दोहे लिए गए। उनमें मुसलमान विद्वान भी हैं। गुरुग्रंथसाहिब में "मानस की जाट एक पहिचानों" की बात कही गई। छुट्टी की जगह गुरुजी के जीवन पर बातचीत व विचार विमर्श हो सकता था जो शायद सरकार की धर्म के प्रति मुहीम में फिट नहीं बैठता था।


जय हिन्द।  

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