Earthquake :- उत्तरी भारत में लगे भूकंप के झटके हिली धरती, इसका कारण चंद्र ग्रहण ?

8 नवम्बर 2022 को चंद्र ग्रहण लगा और 8/9 नवम्बर 2022 की रात में नेपाल सहित उत्तरी भारत में भूकंप के झटके लगे। इस विषय पर विस्तार से बातचीत आगे के लेख में करेंगे।



हमारे भारतवर्ष में धरती, चन्द्रमा, सूर्य को धर्म और आस्था से जोड़ा जाता है। हम लोगो के लिए हिन्दू धर्म के अनुसार ये सब पूजने के विषय हैं। जब ग्रहण लगता है। तो मंदिर और भगवान् की मूर्तियों को ढक दिया जाता है। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसका कारण ये बताया जाता है। कि भगवान् को ग्रहण लग गया। ग्रहण लगने के बाद मंदिरों को व मूर्ति को फिर से गंगा जल के द्वारा शुद्व किया जाता है। यहाँ तक ग्रहण के समय पर भोजन नहीं किया जाता और अगर भोजन आदि है तो उसमें तुलसीकुश के पत्ते डाल दिए जाते है। ताकि ये अशुद्ध न हो। इसके कारण क्या हैं। ?

विज्ञान के अनुसार अगर चन्द्रमा या सूर्य की किरणें (रौशनी) धरती पर न पड़े तो क्या होगा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 8 नवम्बर को जब चंद्र ग्रहण लगा था तो उसके कुछ समय बाद भकंप के झटके लगे समय तकरीबन 8 बजकर 50 मिनट था। चन्द्रमा की रोशनी में जब अवरोध हुआ तो धरती पर उथल-पुथल हुई। और ये उथल-पुथल किसी भी रूप में हो सकती है। अगर समुन्द्र के पास होती तो सुनामी आ जाती या इसका असर तूफ़ान या बाहरी बारिश के रूप में भी हो सकता था। हम भारतीय इसी बात को आस्था से जोड़ते हैं। कि भगवान् को ग्रहण लगा। तो धरती हिली। सबके अलग अलग मापदण्ड हैं। परन्तु ये शब्द सार्थक होंगे कि क्रिया पर प्रतिक्रिया है। सूर्यचन्द्रमा का अपना अपना महत्त्व है। बस उसको समझने की जरूरत है।



अब बात करते हैं क्या हुआ था चंद्रग्रहण की 8 नवम्बर 2022 समय 5 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक था। उसके बाद जो भूकंप आया उसका पहला झटका 8 बजकर 50 मिनट इसकी त्रिवता 4.9 मापी गई। 9 नवम्बर 2022 को दूसरा झटका सुबह 6 बजकर 25 मिनट जिसकी त्रिवता 4.3 थी। और तीसरा  झटका रात्रि 1 बजकर 57 मिनट इसकी त्रीवता 6.3 रही। जिसका असर दो मिनट तक रहा जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे। तो रात में पंखे जो ठण्ड के कारण बंद रहते हैं। वो हिलने लगे। लोग जागे और घरों से बाहर आ गए। परन्तु बहुत से लोगों को पता ही नहीं चला भूकंप की तीव्रता 6.3 मापी गई है। अगर ये ज्यादा होती तो ज्यादा जानमाल का नुक्सान हो सकता था। भूकंप का मेन बिंदु नेपाल का जिला अछाम था जो 10 किलोमीटर धरती के अंदर था। नेपाल में काफी नुक्सान के साथ एक मकान की छत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई। और कई जगह बहुत से लोग घायल हो गए। भूकंप का असर नेपाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमांचल प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा आदि हैं। परन्तु भारत में ज्यादा नुक्सान की ख़बरें नहीं आई।



याद रहे पहले भी इस क्षेत्रों में समय समय पर भूकंप के झटके लगते रहें हैं। 2015 के पास भी नेपाल में भूकंप आया था जिसमें काफी जानमाल का नुक्सान हुआ था उसकी तीव्रता इससे कही ज्यादा थी। और उत्तरी हिमालय भूकंप वाला क्षेत्र कहा भी जाता है। इसीलिए जोर दिया जाता है। कि भवनों के निर्माण में सरिया बढ़िया क़्वालिटी का डाले और ऐसा डाले जो झटका झेल जाए। ग्रामीण क्षेत्र के मिस्त्री मजबूती के कारण ऐसे भवनों का निर्माण कर देते हैं। जो झटके को झेल नहीं पाते और ऐसी स्थिति में मकान गिर जाता है। या दरारें आ जाती हैं। जो घातक है। मकान में सरिये का महत्त्व आगे के लेख में कृपया अपने कमेंट करें।

जय हिन्द।

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