Teacher's Day :- भारतीय शिक्षक दिवस पर विशेष बातचीत

नशा उन्मूलन अभियान पर विशेष लेख



विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। साल 1994 में यूनेस्कों द्वारा शिक्षकों के सम्मान में विश्व शिक्षक दिवस मनाने की घोषणा हुई। 5 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र के तत्त्वाधान में मनाया जाता है। इस दिन अध्यापकों को सामान्य रूप से और कतिपय कार्यरत एवं सेवानिवृत शिक्षकों को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है।

इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1966 में यूनेस्कों और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की, उस संयुक्त बैठक को याद करने के लिए मनाया जाता है जिसमें अध्यापकों की स्थिति पर चर्चा हुई थी और सुझाव दिए गए थे। 1994 से प्रतिवर्ष 100 से अधिक देशों में इसे मनाया जाता है। वर्ष 2022 को 28 वां विश्व शिक्षक दिवस होगा। इस अवसर को एजुकेशन इंटरनेशनल नामक संस्था "गुणवत्ता परक शिक्षा के लिए एकजुट हो"

के नारे के साथ मनाने जा रही है। एक अन्य संस्था इसे "भविष्य में निवेश करें,शिक्षकों में निवेश करें" के विषय के साथ मनाने की तैयारी में हैं।

भारत में 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इसके पीछे का कारण ये है कि भारत के भूत पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन 5 सितम्बर को हुआ। वो पेशे से शिक्षक थे इसलिए 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। उनका जन्म 5 सितम्बर 1888 में हुआ। राधाकृष्णन बड़े विद्वान और दार्शनिक थे। डॉ राधाकृष्णन ने जीवन के अहम 40 साल एक शिक्षक के रूप में देश को दिए। भारतीय शिक्षा को संवारने में बड़ा अहम योगदान है। '

 

'माँ - बाप की मूरत हैं गुरु,कलयुग में भगवान की सूरत हैं गुरु' एक गुरु ही है जो बच्चों के भविष्य नींव को पुख्ता बनाकर उसे उज्जवल बनाने का काम करता है, हर साल 5 सितम्बर, शिक्षक को सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस उत्सव की तरह मनाया जाता है।



अब हम लोग उस दिन किये वादे पर शिक्षक दिवस के अवसर पर नशे जैसी गंभीर समस्या पर कुछ शब्द बस आप लोग ध्यान दीजियेगा। समाज में जागरूकता की कमी के कारण युवा वर्ग नशे की लत का आदि होता जा रहा है। इस समस्या को लेकर समाज भी पूरी तरह सजग नहीं है। लोग नशे को तब तक समस्या नहीं मानते हैं। जब तक उनका जीवन दांव पर नहीं लगता समस्या तब ज्यादा गंभीर हो जाती है। जब अहम टकराना शुरू हो जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति को गलती स्वीकार नहीं है परन्तु आप उसको गलती समझाने का प्रयास करेंगे तो वो व्यक्ति आपको अपना दुश्मन मानने लगेगा। इसलिए शिक्षक दिवस के अवसर पर इस समस्या पर विचार विमर्श जरूरी है। क्यूँ शिक्षक को ट्रेनिंग होती है। कि टिच कैसे करना है। और अगर उसने इस विषय पर रिसर्च कर रखी है। तो वो एडिक्ट की परसनैलिटी को जानता होगा। और नशे की समस्या की गहराइयों की समझ होगी। तो वो समाज से इसकी जड़ें हिला ने का काम करेगा।

इस समस्या ने ऐसे ऐसे व्यक्तित्व छीन लिए जिनकी क्षति समाज के लिए बहुत घातक है परन्तु कुछ नहीं होगा, एक बार में आदत थोड़ी ही जायेगी, नशा इतनी बड़ी समस्या थोड़ी है। अगर नहीं करोगे तो ऊपर जाकर क्या बोलोगे। 

ये सब तर्क से शुरुआत होती है। और शुरू- शुरू में सब ठीक चलता है। आहिस्ता आहिस्ता जब हम इसके गुलाम हो जाते हैं। तो फिर इसकी प्राप्ति के लिए झूठ चोरी,बेईमानी आदि बुराइयाँ व्यक्ति के जीवन में आ जाती हैं। समस्या तब ज्यादा गंभीर हो जाती है जब सामने वाले को पता ही नहीं होता कि इसका कारण क्या है। आप ऐसा क्यूँ कर रहें हैं। इसलिए एक काउंसलर की जरुरत होती है। काउंसलर मतलब शिक्षक। इस समाज के युवाओं को नशे से दूर करने के लिए शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षकों को संकल्प लेना चाहिए कि समाज को नशा मुक्त करेंगे वो भी ईमानदारी से।

लखनऊ मोहनलालगंज के सांसद श्री कौशल किशोर जी द्वारा संकल्प लिया गया है। नशा मुक्ति पर काम करने का उन्होंने सभी से ख़ासकर शिक्षक वर्ग से निवेदन किया था कि 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर संकल्प ले समाज से नशे की बुराई मिटाने की सांसद महोदय, ने 'नशा मुक्त आंदोलन अभियान कौशल का' के तहत जुड़े और लोगों को जोड़े। सांसद जी के साथ इस समस्या पर काम करें। अपने सुझाव दें। एडिक्ट की मानसिकता को समझे घर व जीवन उजड़ने से बचाए।

जिंदगी को हाँ, नशे को ना,

जय हिन्द  

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