Health and Wealth :- जिससे आस हो अगर हो वो ही दगा दे दे तो...

रिश्तों के अंदर ख़त्म होता विश्वास ?

समाज और रिश्ते तभी निभते हैं जब आपसी ताल मेल सही हो एक दूसरे पर पूर्ण विश्वास हो दो मुँह का जीवन या यूँ कहें नक़ाब लगा कर दोहरा किरदार निभाने की इंसान की प्रवृति उसे अमीर बना सकती है। परन्तु सकून नहीं दे सकती इंसान दोहरी जिंदगी क्यूँ जीता है। इसके पीछे का कारण शायद ये होता है कि उसे अहसास है, आंतरिक शून्यता का और उसी अंदरूनी अभाव को वो सामना करने से घबराता है। और दूसरे के सामने अपने आप को सम्पूर्ण दिखाने के लिए दोहरे चरित्र का प्रदर्शन करता है जबकि वो दूसरों से नहीं अपने आप से भी झूठ बोल रहा है। परन्तु इस युग में लोगों को दोहरे जीवन में जीना सही लग रहा है। इसके लाखों उदहरण हैं। अब आप सोनाली फोगाट की ही बात कर लें पैसों के दम पर उसने अपने जीवन के जिस अभाव को भरने की कोशिश की वह असफ़ल रही और अंत में धोखा खाकर जीवन से चली गई। ये है आज का सत्य।




हमारी बात सोनाली फोगाट पर नहीं है। समाज और रिश्तों को लेकर है। जब तक हम अपनी कमियों को नहीं पहचानेंगे तब तक हम अपने व दूसरों के मूल्य को नहीं जान पाएंगे और ऐसे ही मोहरे बनते रहेंगे। एक बात आप जानते हैं, आदमी अति क्यूँ करता है। जैसे नशे की अति, आदमी को किरदार निभाना नहीं आता। वास्तविक रूप से तो वो प्रदर्शन कर लेता है परन्तु चेहरा लगाना नहीं आता और उसका यही असल प्रदर्शन उसको रिश्तों से और समाज से दूर करता है। एक कमी भी रहती है। वो अपनी शून्यता को समझ नहीं पाता और नुकसान उठाता रहता है और एक दिन अंधेरों में खो जाता है। हमारे देश में नशे के ज्यादा बढ़ने का कारण एक ये भी है। आप कहेंगे कैसे समझिए हम सिद्धांतक गांधी और भगत सिंह की बात करते हैं। हम राम और कृष्ण की बात करते हैं। हम गुरु गोविंद सिंह जी की बात करते हैं। इन सबके जीवन का उदाहरण देकर बच्चे को जवान करते हैं परन्तु जब वो सिद्धांतक बात करता है तो हम उसे अन देखा करते हैं। वो आदी नहीं होता दोहरी जिंदगी का वो समाज से तालमेल नहीं बिठा पाता। सारी जिंदगी नुक्सान उठाता है। वक्त के तमाशे देखता देखता वो लोगों के दोहरे किरदार समझ तो जाता है परन्तु खुद उस को करना उसे नहीं आता रिजल्ट रिश्तों का टूट ना और समाज से दूरी।



आपने देखा होगा अक्सर सैलिब्रेटी रेव पार्टियों में नशा करते हैं। सेक्स करते हैं।

क्यूँ ? मीडिया से बचकर वो भी अपने जीवन को एन्जॉय करना चाहते हैं। हालात उन को इजाज़त नहीं देते और जब मौका मिलता है। वो ज्यादा एन्जॉय के चक्कर में नशे और सेक्स का सहारा लेते हैं। अपने लिए मिले उस पल को वो खुल कर जीना चाहते हैं परन्तु नशे के साथ। इसे यूँ कह लें कि मीडिया से छुप कर जीने की उनकी रोज़ मर्रा की लाइफ उनको ज्यादा सुरक्षित रहना सीखाती।

नशा सेन्स को मिटाता है।और उनको नशे के कारण आज़ादी महसूस होती है परन्तु आहिस्ता -आहिस्ता वो नशे के ग़ुलाम हो जाते हैं। ये सत्य है। एक गलत क़दम उनको व उनके कैरियर को ख़त्म कर देता है। अक्सर देखा गया जिंदगी जीने के चक्कर में उनके साथ धोखा हुआ और उन्हें और उनके कैरियर को लूट लिया गया। उनके द्वारा जो उनके हम दर्द बने और लूट कर ले गए।

अब बात करते हैं नार्मल व्यक्ति की वो क्यूँ उलझ जाता है। तो हर व्यक्ति अपने मन का राजा होता है। देखा गया है इस युग में वो व्यक्ति ज्यादा डिस्टर्ब रहता है जिसमें गुण हैं परन्तु बेईमानी नहीं है। उसका स्पष्टतावाद उसके लिए तब घातक हो जाता है जब उसे कोई समझता नहीं है। मैंने देखा है। अगर आप किसी को अपने नज़रिए से उसकी मदद करने की भावना से समझायेंगे वो बुरा मान जाएगा। इसलिए अगर इस युग में बेईमानी नहीं आती, नक़ाब लगाना नहीं आता तो आप चाह कर भी ख़ुश नहीं रह सकते या त्याग करना सीखें। आध्यात्मिकता के अनुसार जीवन जीना सीखें। ईश्वर में ध्यान लगाएँ परन्तु त्याग बहुत जरूरी है। यहाँ बता दें अभ्यास ही मनुष्य को संपूर्ण बनाता है। बेईमान की कुछ दिन की संतुष्टि वाली नहीं हो सकती है। 

                                                                    सदा के लिए जय हिन्द

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