इंसाफ:- माँग रहा फिर भारत हमारा ?

 अंकिता हत्याकांड ?

हमारा देश जो कोई घटना घटने पर जागता है। कैंडिल मार्च होतें हैं। रोष प्रदर्शन होतें हैं। वक्त के साथ केस अपनी चाल चलता है। और लोग भूलकर वापिस वही जिंदगी जीना शुरू कर देतें हैं। फिर नाम बदलता है। फिर कोई बेटी, बहन के साथ अत्याचार होता है। फिर हम लोग नींद से जागते हैं। आखिर कब तक, इस पर इतना कहना चाहूँगा सुन लीजिए:-



अब इन घटनाओं का समाधान ख़ौफ़ नहीं है। क्यूँ कि ख़ौफ़ से तो घटना ज्यादा वाहयात होती है। जिसमें क्राईम करने वाला घटना से बचने के लिए कुछ ऐसा करता है। कि मंजर और भयानक नजर आने लगता है। तो क्या है। इसका समाधान जागरूक होना हमारे समाज की एक बड़ी कमी ये है कि हमने बेटियों को चाहे क़ानूनी रूप से जितनी भी पावर क्यूँ न दे रखी हो परन्तु सामाजिक रूप से उनको वो छूट नहीं है। इसी कारण से लड़की घर पर बात करने से घबराती है। या यूँ कहें कि लड़की दोहरी जिंदगी जीती है। इसी का नुक्सान होता है। हर इंसान में भावनाएँ होती हैं। जिसमें नहीं है। वो निर्जीव है। इसलिए लड़कियाँ घर व समाज के क़ायदों के कारण एक बंधन में बंधी हैं। परन्तु किसी लड़के के द्वारा उसे देखना, पीछा करना,कमेंट करना ये सब उसके रोज़ मर्रा जीवन का एक भाग है। जिसे वो अन देखा करती है। और अगर कोई उसे अच्छा लगता है तो उस समय का आनंद भी लेती है। परन्तु एक मर्यादा में रहकर यहाँ तक तो नॉर्मल है। परन्तु इसके बाद अगर किसी बात की अति हो जाए तो ये घातक है। अब यही होती है। चूक और इन बातों को ज्यादा गंभीर ना लेना कभी कभी बहुत घातक हो जाता  है। अब बात करते हैं समाधान क्या है।

1. इस विषय को छोटी क्लासों से शिक्षा में लाना पड़ेगा, यानी शरीर के बदलाव और उनका महत्व शिक्षा में लेकर आना।

2. परिवार को अपनी बेटी में विश्वास कायम करना पड़ेगा। देखा गया है कई बार माँ लड़की के प्रति ज्यादा सुरक्षित करने के चक्कर में दूरी बना बैठती है।

3. जब लड़की अपने आप को सुरक्षित न महसूस करे तो उसे एक विश्वासनीय व्यक्ति को अपनी समस्या शेयर करती होगी। यहाँ ये ध्यान देने वाली बात है जो उसकी बात सुने वो अनुभवी होना चाहिए।

4. हमारी शिक्षा - नीति में कमियाँ हैं उसको सुधारना होगा। देखा गया है जो शिक्षक हैं वो कागज़ों में तो योग्य हैं परन्तु उनकी व्यवहारिक योग्यता शून्य है।

बाकी जैसा हम लोग घटना घटने पर सहानुभूति दिखाते हैं। वैसे हम पहले नहीं दिखते जो व्यक्ति के स्वभाव में है। अगर किसी की लड़की के बारे में कोई बात पहले पता लगे तो हम लोग उसको बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते परन्तु जब घटना घट जाती है। तब हमारा डर, यानी बेटी तो हमारे घर में भी है। हम रोष मार्च करेंगे, कैंडिल मार्च करेंगे। समय रहते जागते तो शायद घटना होती ही नहीं। बदलाव हमें ही लाना होगा। जागिए और फाँसी की मांग से नहीं हम सब को एक जुट होकर कार्य करने से घटनाओं पर अंकुश लगा सकते हैं।



अब कौन थी अंकिता:- झारखंड के दुमका की अंकिता सिंह 12 वीं क्लास में पढ़ती थी। अंकिता की उम्र मात्र 17 साल थी। वह छोटे बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी। उसकी माँ की डेढ़ साल पहले कैंसर से मौत हो चुकी थी। उसके घर में पिता, दादा, दादी और बहन और एक भाई था। घर की स्थिति सही नहीं थी इसलिए कैरियर बनाने के लिए लगी थी। यानी हालातों ने उसे समय से पहले समझदार कर दिया।

अंकिता के पड़ोस में शाहरुख नाम का लड़का रहता था। जो राजमिस्त्री था यानी वो भी कमाता था। शाहरुख अंकिता को प्रपोज कर चुका था, अंकिता ने उसे इंकार कर दिया परन्तु शाहरुख ज़िद पकड़े था इसी के चलते वो धमकियाँ देने लगा। जब बात ज्यादा बढ़ी तो अंकिता ने अपने पिता को बताया। उन्होंने कहा कल देखते हैं, परन्तु अगली सुबह से पहले ही उसे जला दिया गया। पाँच दिन जिंदगी और मौत के संघर्ष के बाद उसकी मृत्यु हो गई। उसके बयान शाहरुख के खिलाफ गए, और एक वीडियो भी वायरल हुआ। परन्तु ये केस दो जातियों (दो समुदाय) का होने के कारण राजनीतिक रंग में ढल गया। यहाँ पर प्रशासन की चाल धीमी हो गई। सामाजिक माहौल ना बिगड़े इस कारण हर कदम बड़े ध्यान से रखना प्रशासन ने शुरू किया।

इस बीच मोड़ आया कुछ फोटो शाहरुख और अंकिता के सोशल मीडिया पर वायरल हुए अब जांच और गंभीर हो गई। इस केस ने देश कई हिस्सों में हिंदू संगठनों को रोड पर रोष मार्च करने पर मजबूर किया।

माहौल ने हिन्दू - मुसलमान विवाद का रंग लेना शुरू किया परन्तु अब उन दोनों की खींची फोटो वायरल होने के कारण जाँच हो रही है। शाहरुख को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया और उसको अपने किये पर कोई पक्षतावा नज़र नहीं आ रहा। वो हिरासत में मुस्करा रहा है। एक तरफ़ा प्यार ने एक लड़की के जीवन को निगल लिया। अब देखते हैं। जाँच और अदालत का फ़ैसला क्या आता है।



आप अपने कमेंट दें और शेयर करें अगर कुछ नया जांच में आएगा तो वह भी आप लोगों तक लेकर आएँगे जागिए और दूसरों को जगाई ये।

                                                                                                                                                                       धन्यवाद  

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