Bhagat Singh :- भगत सिंह के जन्मदिन पर विशेष। आज तक बहस होती है कि वह क्रांतिकारी था या आतंकवादी ? कमेंट करें।

 


दो दिन पहले यानी 28 सितम्बर सोशल मीडिया पर जन्मदिन के बहाने एक बहादुर, निडर, देशभक्त, समाज सुधारक जितनी भी तारीफ़ की जाए उस 22 साल के शहीद का जन्मदिन था उसे इसी बहाने याद किया गया। शहीदे-ए-आज़म भगत सिंह इस नौजवान ने देश की आज़ादी में अपने द्रढ़ निश्चय से नींव राखी इसी के द्वारा जागृति होने के बाद आज़ादी की लड़ाई ने तेजी पकड़ी भारत की जनता ने पहली बार महसूस किया। कि बहरी सरकार को सुनाने के लिए धमाका जरूरी है। और गांधीकांग्रेस से हट कर एक अलग विचार धारा की बात होने लगी। दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब देश आज़ाद हुआ तो अंग्रेज भारत के उत्तराधिकारी के रूप में आज़ाद लोकतंत्र की डोर कांग्रेस को सौंपकर गए। कुछ वर्ष के बाद लोगों के वोटों से सरकार चुनी जाती थी। क्यूंकि सारा कैंडिट कांग्रेस को मिला था तो कम से कम 25-30 साल कांग्रेस सत्ता में आती रही जबकि देश के आज़ाद होने के बाद महात्मा गांधी कांग्रेस को हटाना चाहते थे उनके अनुसार कांग्रेस का का गठन जिन सिद्धांतों के लिए किया गया था वो कार्य पूरा हो चुका था। परन्तु महात्मा गांधी की हत्या हो गई और कांग्रेस आगे चल कर अलग अलग भागों में विभाजित होती गई और आखिर में जो पावर में कांग्रेस रही व अब तक है। वो इंदिरा गांधी की कांग्रेस है। जैसे जैसे कांग्रेस की पकड़ कम होती गई वैसे वैसे उस नौजवान को याद करना बढ़ता गया।



जबकि वह नौजवान जिसका नाम भगत सिंह था वो लेनिन की विचारधारा में विश्वास रखता था और लेनिन कामरेड पार्टी के मुख्य नेताओं में थे। मतलब भगत सिंह कामरेड थे। परन्तु आज़ादी के बाद कांग्रेस की 8 टीम में कामरेड ने काम किया। इस देश में सिर्फ एक समय ऐसा आया था जब कामरेडों का प्रधानमंत्री बन सकता था परन्तु उन्हें अलग अलग पावों की सरकार मंजूर नहीं थी। आहिस्ता आहिस्ता कामरेड व उनकी पार्टियां विलुप्त हो गई। और भगत सिंह के नाम का इस्तेमाल कांग्रेस विरोधी ताकतों द्वारा किया जाने लगा यहाँ पर भगत सिंह को एक फिल्म के हीरो के रूप में पेश किया गया। और कांग्रेसमहात्मा गांधी को विलेन के रूप में पेश किया गया। असल में भगत सिंह की विचार धारा क्या थी वो क्या सोचता था इस बात से किसी को कोई मतलब नहीं था। भगत सिंह को तो सभी चाहते थे कि वो आज़ाद भारत में भी आये और लोगों के लिए कुछ करें। परन्तु उसका जन्म पड़ोसियों के घर में हो। ऐसी सोच वाले लोग इस देश का क्या भला कर पाएंगे ये तो ऊपर वाला ही जाने वैसे अपनी विचारधारा के कारण भगत सिंह किसी भी धर्म में विश्वास नहीं रखते थे। शायद उनकी इसी विचारधारा को छुपा कर उनका इस्तेमाल कांग्रेस के विरोध में होता रहा। अब आज सब ने जन्मदिन के नाम पर याद किया। पंजाब के मुख्यमंत्री ने तो उनके पैतृक गाँव में तकरीबन 25 एकड़ खड़ी फ़सल उजाड़कर वही 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे के साथ शपथ ली पद व गोपनीयता की परन्तु शायद कभी उनके जन्मदिन पर छुट्टी की हो किसी सरकार ने। एक मौजूदा सांसद ने तो भगत सिंह को आतंकवादी तक कह दिया। इस बात का काफी विरोध हुआ। परन्तु भगत सिंह को वो सम्मान सरकार के दृष्टिकोण से नहीं मिला जिसके वो हकदार थे।



वैसे आपको बता दे कि भगत सिंह अंग्रेजी सरकार के समय जब उस पर मुक़दमा चल रहा था अपने आपको युद्ध बंदी के रूप में पेश करते रहे और कहते रहे कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ा है। परन्तु अंग्रेज उन्हें आतंकवादी ही कहते रहे और गांधी ने भी जो उस समय क्रांतिकारियों के मेन नेता थे उन्होंने भी जब भगत सिंह के खिलाफ साइन किये तो उन्होंने भी भगत सिंह को आतंकवादी ही लिखा। शायद इसी कारण से किसी भी सरकार ने सविंधानिक रूप से भगतसिंह को क्रांतिकारी का खिताब नहीं दिया और उनके जन्मदिन पर सरकारी छुट्टी नहीं की जाती। यहाँ तक एक बार चंडीगढ़ में उनकी फोटो लगी गाड़ियों के चालान भी कटे और कहा गया ये आतंकवादी की श्रेड़ी में आते हैं। इसीलिए भगत सिंह पर सरकारों द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किया गया। बाकी अपने आपको क्रांतिकारी विचारधारा वाले लोग या कांग्रेस और दूसरी सरकारों की नीतियों के खिलाफ चलने वाले लोगों का चहेता भगत सिंह ही रहा। भगत सिंह पर राजनीति भी होती रही परन्तु जिस सम्मान का वो हकदार था वो उसे नहीं मिला या किसी ने नहीं दिया चाहे सरकार किसी की भी रही हो।



अब उनके जन्मदिन पर भगत सिंह जन्म 28 सितम्बर 1907 गाँव बंगा जिला लायलपुर जो अब पाकिस्तान में है। हुआ था। उनका पैतृक गाँव खटकल कला जिला नवाशहर पंजाब भारत में है। उनके जन्म के अवसर पर भगत सिंह के परिवार के सदस्य जैसे उनके पिता व चाचा अजीत सिंह जेल में थे वह क्रांतिकारी थे। भगत सिंह शुरू में महात्मा गांधी के फैन थे। परन्तु गांधी ने जब आंदोलन वापिस लिया अंग्रेज अफसरों की हत्या के कारण तो उन्हें काफी धक्का लगा गांधी के इस कदम के कारण साईमन कमेटी की वापिसी के विरोध में करते हुए जब अंग्रेजों ने लाठीचार्ज किया। तो लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई। भगत सिंह व उनके साथी इसे हत्या मानते थे। जिसके कारण उन्होंने अंग्रेज अधिकारी की हत्या की परन्तु उन्होंने जिसको मारना था उसकी जगह दूसरा छोटा अधिकारी मर गया। इसी बात को लेकर सांसद सिमरण जीत सिंह मान ने इनको आतंवादी कहा सांसद का कहना था कि न तो उस अधिकारी का दोष था व न उस हवलदार चानण सिंह का हवलदार चानण सिंह को तो सांसद ने अमृत धारी सिक्ख बताया हालांकि इस बात पर सांसद की काफी खिलाफत हुई। भगत सिंह व उनके साथियों ने अंग्रेजो की नींद हराम कर रखी थी परन्तु कुछ ऐसा वह नहीं कर पा रहे थे जिससे अंग्रेज भारत को आजाद कर पाएं। जब तक ये बातें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुँचती तब तक भारत के हालात दुनिया कैसे जानती इसलिए प्लान किया भगत सिंह ससद बम धमाका जिसे पूरा किया गिरफ्तारी दी और मीडिया को मजबूर किया क्रांतिकारियों का पक्ष लिखने के लिए परन्तु ब्रिटिश हुकूमत चालाकी से भगत सिंह को आतंकवादी सिद्ध कर गई और उसे फांसी दी गई। इस सोची समझी साजिश से भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की हत्या की गई परन्तु इन नवयुवकों ने देश को जागृति कर दिया। जब महात्मागांधी ने आधा स्वराज माँगा तो भगत सिंह ने पूर्ण स्वराज का नारा दिया जिसका समर्थन पंडित नेहरू ने भी किया। जिस पर गांधी ने नेहरू को फटकारा भी था। भगत सिंह भारत के लोगों के दिलों में बस गया था कुर्बानी ही ऐसी थी उस नौजवान की। आप भी अपने विचार लिखें कमेंट करें। अपनी विचारधारा को शेयर करें। 

      धन्यवाद

     चन्दन सिद्धू

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