Shraddha Walker Murder Case :- अपने इतिहास की घटनाओं से नहीं सीख ले रहा भारतीय समुदाय ?



श्रद्धा वाकर की हत्या या पीछे घटी ऐसी बहुत सी घटनाओं पर राजनीति तो बहुत हुई सीख किसी ने नहीं ली। ऐसे घटनाओं की शुरुआत फ्लॅट से शुरू होकर इसका अंत बड़ा ही कष्ट दाई होता है।



देखा गया है एक दूसरे की तरफ आकर्षित होकर जीवन साथ जीने के फैसले जब सच्चाई का सामना होता है। तो अक्सर ये फैसले बोझ बनकर इनका अंत बहुत भयानक होता है। अगर हम राजनीति पार्टियों और कट्टर हिन्दू-मुसलमान संस्थाओं को छोड़ दे तो हमारा समाज बिना किसी भेदभाव से आपस में मिलकर रहता है। उसी बीच ये घटनाएँ होती हैं। जो दोनों समुदाय में दूरियां बढ़ाती हैं। अब इसका हल क्या ? मेरे को लगता है। हम लोग गलत तरीके से जीवन जी रहे हैं। अगर मुझे मेरे समुदाय और संस्कारों से प्यार है। तो हमारा सविंधान उसका क्या जो हमें भारतीय कहता है। परन्तु वोट बैंक के लिए नेता हमें उस समुदाय की वोट कहते हैं। जिनकी भावनाएं भड़काऊ और अपने लिए वोट ले लो इस बात का जिक्र इसलिए भी कर रहा हूँ जहाँ तक मेरी समझ है मुसलमानों में एकता ज्यादा है। वो अपने धर्म से जुड़े रहते हैं। परन्तु हिन्दू, कट्टर मुसलिम समाज को दुश्मन मानते हैं और ब्यान देतें है सार्वजनिक करते हैं। अपने ब्यानों को जो जरुरत से ज्यादा होने के कारण लोग उनको नजर अंदाज करने लगते हैं। ये तो है एक बात मजहब की बात मुसलिम करते हैं। परन्तु एक मंच तक शायद उनको अहसास है। कि वो लोग बहुगिनती के सामने कुछ नहीं कर पाएंगे इसलिए वो अपनी भावनाओं को सीमित रखते हैं।



अब रही उन बच्चियों की बात जो शिकार हो रही हैं। प्यार के चक्कर में उनको इन सब का महत्त्व ही नहीं पता और परिवार भी उन्हें जागृत नहीं करते और नुक्सान होता है। प्यार का अर्थ शारीरिक सुख नहीं त्याग है। परन्तु उस त्याग का अर्थ भी समझने वाला चाहिए। जो लड़कियां प्यार के चक्कर में अपने माता-पिता से भी तो उनका प्यार है। परन्तु शायद ज्यादा लाड़प्यार के चक्कर में बच्चे माता-पिता के त्याग को न समझ के उनकी डांट में छिपी चिंता को न समझ के एक ऐसे साथी के साथ में जीवन जीने को तैयार हो जाते हैं। जो कभी कभी लुटेरा होता है। और अक्सर देखा गया है। घर से भागने वाला जोड़ा या मुर्ख होता है। या लुटेरा और दोनों ही सूरतों में नुक्सान होगा या तो परिवार की इज्जत का या मृत्यु के बाद माता-पिता को औलाद के खोने का दर्द, इसलिए ये आज जो नई उम्र की पीढ़ी प्यार और उस पर लैक्चर देती है। जब तक इसके मायने नहीं समझेगी तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी इसलिए आकर्षक को प्यार न समझे अपने भौतिक सुखों के लिए अपने माता-पिता के प्यार का निराधर न करें।

जय हिन्द

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